April 13, 2021
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2 मार्च 2021: फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर के वी के मथुरा द्वारा स्कूल विद्यार्थी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

उत्तर प्रदेश पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवम गो अनुसंधान संस्थान के अधीन कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र मथुरा द्वारा आज दिनांक 2 मार्च 2021 यथा स्थान फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत गांधी इंटर कॉलेज छाता, मथुरा में स्कूल विद्यार्थी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया यह कार्यक्रम केंद्र के अध्यक्ष डॉ एस के मिश्रा के दिशा निर्देशन में किया गया जिसमें 112 विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों ने भाग लिया । कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा परियोजना के अंतर्गत तीन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें निबंध लेखन प्रतियोगिता में मनीष कुमार गुर्जर प्रथम स्थान, हरिओम द्वितीय स्थान, दुर्गेश कुमार तृतीय स्थान प्राप्त किया। चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जितेश कुमार, द्वितीय स्थान यतेंद्र शर्मा , तृतीय स्थान मनीष कुमार को मिला। इसी तरह वाद विवाद प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रथम स्थान सत्येंद्र प्रताप सिंह, द्वितीय स्थान सुनील कुमार व तृतीय स्थान सुमित कुमार द्वारा प्राप्त किया । इसके अलावा विद्यालय के प्रवक्ता श्री सुनील कुमार शर्मा उप प्रधानाचार्य , प्रमोद कुमार अग्रवाल, राजेश कुमार , राकेश रंजन सिंहा, हरिराम जी द्वारा विद्यार्थियों की प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया गया तथा विद्यार्थियों को यथा स्थान फसल अवशेष प्रबंधन के अंतर्गत डॉक्टर वाई के शर्मा वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र मथुरा द्वारा बताया गया कि पराली को खेत में मिलाने से खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ती है तथा पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता है, पराली को खेत में मिलाने के लिए भारत सरकार एवं कृषि विभाग द्वारा नई नई मशीनों को किसानों को अनुदान पर देय है तथा पराली को खेत में मिलाने से खेतों की उर्वरा शक्ति के साथ साथ जीवांश की मात्रा भी बढ़ती है कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ रविंद्र कुमार राजपूत द्वारा विद्यालय के छात्रों को बताया कि पराली को खेत में मिलाने से पौधों के लिए उपलब्ध पोषक तत्व प्राप्त होते हैं तथा उपज की गुणवत्ता भी बढ़ती है तथा भूमि की सेहत में भी सुधार होता है जो जमीन का भोजन है । खेतों के लिए फसल अवशेष , सड़ी हुई गोबर की खाद, हरी खाद एवं पोषक तत्व है जिससे पौधे की वृद्धि व बढ़वार होती है जमीन को ऊपजाऊ बनाए रखना बहुत जरूरी है इसलिए किसानों को पराली नहीं जलाना चाहिए जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है।